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ऋषि चला ऋषिकेश
सुबह के 8 बजे थे और ऋषि के कानों पर अलार्म की घंटी ट्रन-२ करके बजने लगी । ऋषि फुर्ती से बिस्तर से उठ खड़ा हुआ । वैसे ऋषि रोज 7 बजे के आस–पास उठा करता था पर आज का दिन उसके लिए खास था । ऋषि पाँचवी कक्षा मे पढ़ता था और आज उसके स्कूल से 2 दिन की पिकनिक का टूर ऋषिकेश कैम्पिंग के लिए जा रहा था । और यही खास बात है कि पिकनिक पर जाने के लिए वह रोज से एक घंटा पहले ही उठ चुका था । रात को उसने अपनी मम्मी से सुबह 6 बजे का अलार्म लगवा लिया था की वह सुबह टाइम पर तैयार हो जाए ।
ऋषि गुरुग्राम के एक जाने-माने स्कूल ‘ओर्किड पब्लिक स्कूल’ मे पढ़ता था । वहाँ पे कुछ गिने-चुने एन.आर.आई. के बच्चे भी पढ़ते थे । ऋषि अपने मम्मी–पापा के साथ गुरुग्राम के सुशांत लोक कॉलोनी मे एक बहुमंजिला सोसाइटी मे रहता था ।
उस सोसाइटी मे काफी बड़े-२ और महंगे घर थे ।ऋषि के पिता मिस्टर राजीव वर्मा एक आईटी कंपनी मे वाइस-प्रेसिडेंट के पद पर थे और कमा भी काफी अच्छा लेते थे । राजीव वर्मा का यह सोशल स्टैटस बचपन से ही ऐसा न था । रजीव का बैकग्राउंड एक माध्यम वर्गीय परिवार से ही था ।
दिल्ली के Delhi College of Engineering से ITकी पढ़ाई के बाद आज वह उस पद पर पहुँच पाए थे । राजीव की पत्नी उर्मी बी. कॉम पास थी । शादी के बाद कुछ साल तक तो वह भी एक अकाउंट फॉर्म में जॉब करती थी पर अब वह हाउस मेकर ही थी ।
सुबह के 6:30 बजे होंगे और ऋषि अपनी कैजुअल ड्रेस में रेडी हो रहा था ।
‘ऋषि डाइनिंग टेबल पर आओ ब्रेकफास्ट रेडी है’- उर्मी ने पुकारा ।
घर में खाने और सफाई के लिए मेड लगाई हुई थी । मेड 7:00 बजे के बाद ही आती थी तो आज नाश्ता ऋषि की मां उर्मी ने ही बनाया था । नाश्ते मे पोहा बनाया गया था और साथ मे बॉर्नविटा वाला दूध भी था ।
उधर राजीव भी तब तक उठ चुके थे और 25वीं माले की अपनी बालकनी में बैठे ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ पढ़ रहे थे । साथ में चाय भी थी।
ऋषि खाने की मेज पर बैठा और पोहे और दूध की तरफ देखने लगा ।
‘क्या मम्मी दूध-ब्रेड ही काफी था । इतनी सुबह-२ पोहा ?’- ऋषि ने मुंह सकोड़ते हुए बोला ।
‘गुड़गाँव से ऋषिकेश का रास्ता काफी लंबा है . . ....
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